Happy Achievement By WordPress

image : by WordPress Happy 1 Year Anniversary Achievement. By WordPress To artpens © gayshir 2019 Advertisements

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By WordPress For Me

Congratulation By WordPress On 16/12/2018 Thanks By / Hare Krishna ‘Gayshir’ © gayshir 2018

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Congratulation By WordPress On 16/12/2018 Thanks By / Hare Krishna ‘Gayshir’ © gayshir 2018

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H.G.Poornima

गुरू पूर्णिमा की शुभकामनाएं / Happy Guru Poornima © gayshir 2018

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गुरू पूर्णिमा की शुभकामनाएं / Happy Guru Poornima © gayshir 2018

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Thanks/धन्यवाद.

Image: By WordPress To my WordPress website artpens On 04/06/2018 छवि: वर्डप्रेस द्वारा मेरे वर्डप्रेस वेबसाइट आर्टपेन्स (कलाकृृृृतियाँ) के लिए 04/06/2018 को Thanks to all my Fans, Followers, Readers and Viewers. मेरे सभी प्रशंसकों, अनुयायियों, पाठकों और दर्शकों के

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Image: By WordPress To my WordPress website artpens On 04/06/2018 छवि: वर्डप्रेस द्वारा मेरे वर्डप्रेस वेबसाइट आर्टपेन्स (कलाकृृृृतियाँ) के लिए 04/06/2018 को Thanks to all my Fans, Followers, Readers and Viewers. मेरे सभी प्रशंसकों, अनुयायियों, पाठकों और दर्शकों के

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काला कुत्ता रास्ता काटा

क्या बताउँ उस दिन? क्या हो गया साथ? याद नहीं कुछ देर की, शेष सभी स्मरण साथ – दुपहिया वाहन और चौड़ी सड़क – जैसे नया काला कपड़ा कड़क, लेकिन थी विभाजक/डिवाइडर बिन । एक

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क्या बताउँ उस दिन? क्या हो गया साथ? याद नहीं कुछ देर की, शेष सभी स्मरण साथ – दुपहिया वाहन और चौड़ी सड़क – जैसे नया काला कपड़ा कड़क, लेकिन थी विभाजक/डिवाइडर बिन । एक

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पहले और अब

दो दिन पहले कोहरा था, जाड़े का असर गहरा था, सुबह धुन्धली, दोपहर बाद साफ़- गर्मी पढ़ रहा ककहरा था । रास्तों पे उड़ रहे धूल- सूखने लगे हैं कोमल फूल, कांटे होने लगे हैं

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दो दिन पहले कोहरा था, जाड़े का असर गहरा था, सुबह धुन्धली, दोपहर बाद साफ़- गर्मी पढ़ रहा ककहरा था । रास्तों पे उड़ रहे धूल- सूखने लगे हैं कोमल फूल, कांटे होने लगे हैं

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अमर आशा (Imortal hope)

आशा कभी नहीं मरती, भाषा बदलती है परिधान । कथा करबट लेती है – वही धरती वही आकाश । (Hope never dies, Language changes garment. The story takes place – The same earth is the

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आशा कभी नहीं मरती, भाषा बदलती है परिधान । कथा करबट लेती है – वही धरती वही आकाश । (Hope never dies, Language changes garment. The story takes place – The same earth is the

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खिड़की से

सीमित परन्तु दुनियाँ दिखती है, राह चलता इनसान दिखता है। बेचने ख़रीदने वालों के भाव- बिका हुआ सामान दिखता है। हवा नहीं, आती है दवा भी- कुम्हलाहट से उबरने की। अवसर मिलती है ताज़गी को,

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सीमित परन्तु दुनियाँ दिखती है, राह चलता इनसान दिखता है। बेचने ख़रीदने वालों के भाव- बिका हुआ सामान दिखता है। हवा नहीं, आती है दवा भी- कुम्हलाहट से उबरने की। अवसर मिलती है ताज़गी को,

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जाड़े का अचरज

चाँद पूर्णिमा में पूरा, अन्य दिन आधा-अधूरा। कभी कुछ नहीं, अन्धेरा हर कहीं। परन्तु अचरज! जाड़े में सूरज- दाग़-धब्बा रहित, शीतल प्रकाश सहित, गर्मी से अनजान बन जाते हैं- पूरा चाँद बन जाते हैं।

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चाँद पूर्णिमा में पूरा, अन्य दिन आधा-अधूरा। कभी कुछ नहीं, अन्धेरा हर कहीं। परन्तु अचरज! जाड़े में सूरज- दाग़-धब्बा रहित, शीतल प्रकाश सहित, गर्मी से अनजान बन जाते हैं- पूरा चाँद बन जाते हैं।

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धुन्धली रात

कोहरे से भरी रात,  कठिन होती सरल बात,  बेदम होती है रौशनी,  दूर एक रंग-सात।            :- गयशिर

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कोहरे से भरी रात,  कठिन होती सरल बात,  बेदम होती है रौशनी,  दूर एक रंग-सात।            :- गयशिर

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आज का

दो दिन बाद दोपहर के, कुछ देर को धूप निकली, राहत मिली देख के, धुंधलके की ज़िद्द छूटी.

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दो दिन बाद दोपहर के, कुछ देर को धूप निकली, राहत मिली देख के, धुंधलके की ज़िद्द छूटी.

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