Some Lines:04,मानव की पूजा

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin मानव धर्म से बड़ा, न धर्म कोई दूजा। मानवों की सेवा मानव की है, सबसे बड़ी पूजा। पुरस्कृत करती सभी को, दण्डित भी करती है प्रकृति, दण्ड भुगतना पड़ता है, राजा हो या

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