Some Lines:03,अंधेरा-उजाला

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin दया का पात्र, कोई भी हो सकता है। अंधेरा के कारण ही, उजाला दिखता है। पूरा कोई अधुरा, कोई दोनों से भी कम, सामर्थ्यवान किसी का भी, सहायक बन सकता है। “””गयशिर””” Share

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