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पहले और अब

दो दिन पहले कोहरा था,

जाड़े का असर गहरा था,

सुबह धुन्धली, दोपहर बाद साफ़-

गर्मी पढ़ रहा ककहरा था ।

रास्तों पे उड़ रहे धूल-

सूखने लगे हैं कोमल फूल,

कांटे होने लगे हैं कठोर,

ढका रहता, प्रायः चेहरा था ।

मौसम में बदलाव शुरू हुआ,

सिकुड़न में खिचाव आने लगा,

भारी पोशाक रखी जायेगी अब-

चल पड़ेगा जो ठहरा था।

:- गयशिर

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