artpens

Month: February 2018

प्रेम है/Love is

Love as many,

The eternal is beginning of a,

From God open-

The holy and novel.

सुगंध आया

व्यतीत हो चुका है-

रात्रि का प्रथम प्रहर,

नयनों में नींद का आगमन।

पवन ने रुख बदले,

रजनीगंधा का सुगंध आया-

सुगंधित हो उठा वातावरण।

उत्पत्ति देश मैक्सिको की,

विश्व के चुनिन्दा देशों में-

भारत भी इसे पाया।

#गयशिर

अच्छा संयोग

घास की आड़ में-

जड़ में दीवार के,

शिकारी छुपा था,

करने को शिकार।

बिलांग भर ऊपर,

शिकार का घर,

बाहर थे बड़े,

बच्चे ताक-झांक में,

मग्न थे-

खेल में,

ख़तरों से अन्जान।

संयोग अच्छा-

ईंट का असंतुलित टुकड़ा,

गिरा ज़मीन पे-

अन्य टुकड़े के सर पर,

आवाज़ हुई,

अन्दर दुबक गए बच्चे,

घबरा कर-

शिकारी भाग गया,

साथ गई आफ़त।

Some Lines:04,मानव की पूजा

मानव धर्म से बड़ा, न धर्म कोई दूजा।

मानवों की सेवा मानव की है, सबसे बड़ी पूजा।

पुरस्कृत करती सभी को, दण्डित भी करती है प्रकृति,

दण्ड भुगतना पड़ता है, राजा हो या हो प्रजा।

—गयशिर—

Some Lines:03,अंधेरा-उजाला

दया का पात्र, कोई भी हो सकता है।

अंधेरा के कारण ही, उजाला दिखता है।

पूरा कोई अधुरा, कोई दोनों से भी कम,

सामर्थ्यवान किसी का भी, सहायक बन सकता है।

“””गयशिर”””

काला कुत्ता रास्ता काटा

क्या बताउँ उस दिन?

क्या हो गया साथ?

याद नहीं कुछ देर की,

शेष सभी स्मरण साथ –

दुपहिया वाहन और चौड़ी सड़क –

जैसे नया काला कपड़ा कड़क,

लेकिन थी विभाजक/डिवाइडर बिन ।

एक तरफ़ एक दुकान –

दुसरी ओर बियाबान ।

आगे-पीछे कोई नहीं ,

सामने साफ़-सुथरा ।

तीव्र और उचित गति ,

निर्विकार शुद्ध मति ,

कोई नहीं देख पाया !

तेज दौड़ता काला कुत्ता,

रास्ते को बेझिझक काटा।

निश्चिंत चलता वाहन टकराया ,

चालक का पैर फंसा ,

दुपहिया के नीचे ,

साथी वाहन के पीछे ,

सम्भल कर खड़ा होते हुए।

सहायता को लोग आए,

मनुष्य मनुज के काम आए।

गाड़ी छतिग्रस्त हुई,

दोनों सवारी चोट खाई,

बड़े संयोग की बात !

बहुत होके कम हुआ ,

जीवन को सुरक्षित पाया ।

सरकारें सड़कें बनवातीं हैं,

वचन निभातीं हैं,

रह जाती हैं बड़ी-बड़ी चूकें-

विभाजक बिन राष्ट्रीय राजमार्ग-

आमन्त्रण देती घटनाओं को,

रूप देती दुर्घटनाओं को,

ठगे जाते हैं लोग-

होते हैं घायल व अपंग,

बड़ा ही दुखद कुछ –

अन्त को पाते हैं।

:- गयशिर

पहले और अब

दो दिन पहले कोहरा था,

जाड़े का असर गहरा था,

सुबह धुन्धली, दोपहर बाद साफ़-

गर्मी पढ़ रहा ककहरा था ।

रास्तों पे उड़ रहे धूल-

सूखने लगे हैं कोमल फूल,

कांटे होने लगे हैं कठोर,

ढका रहता, प्रायः चेहरा था ।

मौसम में बदलाव शुरू हुआ,

सिकुड़न में खिचाव आने लगा,

भारी पोशाक रखी जायेगी अब-

चल पड़ेगा जो ठहरा था।

:- गयशिर