खिड़की से

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin सीमित परन्तु दुनियाँ दिखती है, राह चलता इनसान दिखता है। बेचने ख़रीदने वालों के भाव- बिका हुआ सामान दिखता है। हवा नहीं, आती है दवा भी- कुम्हलाहट से उबरने की। अवसर मिलती है

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