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जाड़े का अचरज

चाँद पूर्णिमा में पूरा,

अन्य दिन आधा-अधूरा।

कभी कुछ नहीं,

अन्धेरा हर कहीं।

परन्तु अचरज!

जाड़े में सूरज-

दाग़-धब्बा रहित,

शीतल प्रकाश सहित,

गर्मी से अनजान बन जाते हैं-

पूरा चाँद बन जाते हैं।

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