कहते हैं किसान

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जाड़े का अचरज

चाँद पूर्णिमा में पूरा, अन्य दिन आधा-अधूरा। कभी कुछ नहीं, अन्धेरा हर कहीं। परन्तु अचरज! जाड़े में सूरज- दाग़-धब्बा रहित, शीतल प्रकाश सहित, गर्मी से अनजान बन जाते हैं- पूरा चाँद बन जाते हैं।

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चाँद पूर्णिमा में पूरा, अन्य दिन आधा-अधूरा। कभी कुछ नहीं, अन्धेरा हर कहीं। परन्तु अचरज! जाड़े में सूरज- दाग़-धब्बा रहित, शीतल प्रकाश सहित, गर्मी से अनजान बन जाते हैं- पूरा चाँद बन जाते हैं।

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