अमर आशा (Imortal hope)

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin आशा कभी नहीं मरती, भाषा बदलती है परिधान । कथा करबट लेती है – वही धरती वही आकाश । (Hope never dies, Language changes garment. The story takes place – The same earth

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खिड़की से

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin सीमित परन्तु दुनियाँ दिखती है, राह चलता इनसान दिखता है। बेचने ख़रीदने वालों के भाव- बिका हुआ सामान दिखता है। हवा नहीं, आती है दवा भी- कुम्हलाहट से उबरने की। अवसर मिलती है

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जाड़े का अचरज

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin चाँद पूर्णिमा में पूरा, अन्य दिन आधा-अधूरा। कभी कुछ नहीं, अन्धेरा हर कहीं। परन्तु अचरज! जाड़े में सूरज- दाग़-धब्बा रहित, शीतल प्रकाश सहित, गर्मी से अनजान बन जाते हैं- पूरा चाँद बन जाते

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धुन्धली रात

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedinकोहरे से भरी रात,  कठिन होती सरल बात,  बेदम होती है रौशनी,  दूर एक रंग-सात।            :- गयशिर Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin

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आज का

Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedinदो दिन बाद दोपहर के, कुछ देर को धूप निकली, राहत मिली देख के, धुंधलके की ज़िद्द छूटी. Share this…FacebookPinterestTwitterLinkedin

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