artpens

Month: January 2018

अमर आशा (Imortal hope)

आशा कभी नहीं मरती,

भाषा बदलती है परिधान ।

कथा करबट लेती है –

वही धरती वही आकाश ।

(Hope never dies,

Language changes garment.

The story takes place –

The same earth is the same sky.)

:- गयशिर (Gayshir)

खिड़की से

सीमित परन्तु दुनियाँ दिखती है,

राह चलता इनसान दिखता है।

बेचने ख़रीदने वालों के भाव-

बिका हुआ सामान दिखता है।

हवा नहीं, आती है दवा भी-

कुम्हलाहट से उबरने की।

अवसर मिलती है ताज़गी को,

होकर दिल से गुज़रने की।

आने वाले मौसम का अनुमान,

जो बीत चुका उसका परिणाम।

दिखता है आवाज़ का चेहरा,

मिलता है शरीर को आराम।

:- गयशिर

जाड़े का अचरज

चाँद पूर्णिमा में पूरा,

अन्य दिन आधा-अधूरा।

कभी कुछ नहीं,

अन्धेरा हर कहीं।

परन्तु अचरज!

जाड़े में सूरज-

दाग़-धब्बा रहित,

शीतल प्रकाश सहित,

गर्मी से अनजान बन जाते हैं-

पूरा चाँद बन जाते हैं।